समय से नहर में पानी न आने से किसान परेशान, दूसरी तरफ डीजल के लिए रातभर लगानी पड़ रही लाइन

Rakesh Chaudhary
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Samay se nahar me paani na aane se kisan pareshan…

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में इस समय किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। एक तरफ समय पर नहरों में पानी नहीं पहुंच रहा है, वहीं दूसरी तरफ खेतों की सिंचाई के लिए डीजल पंप चलाने को किसानों को रातभर पेट्रोल पंपों पर लाइन लगानी पड़ रही है। भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की लापरवाही के कारण उनकी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

गांवों में इस समय धान की नर्सरी, सब्जियों और अन्य खरीफ फसलों की तैयारी चल रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर पानी नहीं मिला तो उनकी मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद हो जाएगा। कई किसानों ने आरोप लगाया कि नहरों की सफाई और मरम्मत के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि टेल तक पानी पहुंच ही नहीं पा रहा है।

Samay se nahar me paani na aane se kisan pareshan…

क्षेत्र के किसान बताते हैं कि पिछले कई दिनों से नहर सूखी पड़ी हुई है। नहर में पानी नहीं आने के कारण खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। किसान मजबूरी में निजी बोरिंग और डीजल पंप का सहारा ले रहे हैं। लेकिन डीजल की बढ़ती कीमत और पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइन ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

कई गांवों में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि किसान रात 10 बजे से ही पेट्रोल पंपों पर डीजल लेने पहुंच जा रहे हैं। सुबह तक लंबी लाइन लगी रहती है। किसानों का कहना है कि दिन में अत्यधिक भीड़ और गर्मी के कारण रात में ही डीजल लेना पड़ता है। कई बार घंटों इंतजार करने के बाद भी डीजल नहीं मिल पाता, जिससे किसानों में भारी नाराजगी है।

एक किसान ने बताया कि “सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान सिंचाई के पानी के लिए भटक रहा है। नहरों में समय से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है और डीजल के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। ऐसे में खेती करना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है।”

ग्रामीण इलाकों में बिजली की अनियमित आपूर्ति भी किसानों की समस्या को और गंभीर बना रही है। जिन किसानों के पास बिजली से चलने वाली मोटर है, उन्हें भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही। कई गांवों में रात में कुछ घंटे ही बिजली दी जा रही है। ऐसे में किसान मजबूरी में डीजल पंप का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे लागत लगातार बढ़ रही है।

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सिंचाई की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो धान की रोपाई और दूसरी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। पहले ही खाद, बीज और कीटनाशक के दाम बढ़ चुके हैं, अब सिंचाई का संकट किसानों की कमर तोड़ रहा है।

क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान नेताओं ने भी इस समस्या को गंभीर बताते हुए प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि नहर विभाग और प्रशासन को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर सुनिश्चित करना चाहिए कि हर गांव तक समय से पानी पहुंचे। साथ ही पेट्रोल पंपों पर किसानों के लिए अलग व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि उन्हें घंटों लाइन में न लगना पड़े।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया और डीजल की उपलब्धता सुचारु नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और यदि फसल बर्बाद हुई तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।

गांवों में इस समय हर चौपाल और चौराहे पर किसानों की यही चर्चा है। कोई नहर विभाग को कोस रहा है तो कोई बिजली विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। किसानों का कहना है कि सरकारी दावे केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग है।

स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों से भी इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाने की अपील की है। उनका कहना है कि किसान देश की रीढ़ है और यदि किसान ही परेशान रहेगा तो गांव और देश दोनों की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। किसानों को समय पर पानी, बिजली और डीजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग किसानों की इस गंभीर समस्या को कितनी जल्दी दूर कर पाते हैं। फिलहाल किसान आसमान की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं और बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उनकी फसलें बच सकें और उन्हें राहत मिल सके।

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