रंगों का त्योहार होली खुशियां, उल्लास और अपनों के साथ हंसी-ठिठोली का संदेश देता है। लेकिन इस बार जनपद महराजगंज के एक परिवार के लिए यह पर्व ऐसा अंधेरा लेकर आया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। निचलौल-पुरैना मुख्य मार्ग पर जमुई और भेड़िया के बीच स्थित कुख्यात ‘खूनी पुल’ ने एक और हंसते-खेलते घर का चिराग बुझा दिया। इस दर्दनाक सड़क हादसे में निचलौल निवासी भगवान दास गुप्ता की मौके पर ही मौत हो गई।
कैसे हुआ हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, भगवान दास गुप्ता अपनी होंडा बाइक (UP56 AU 6923) से चिउटहां की ओर से निचलौल वापस लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही वह जमुई पंडित के पास पकड़ी रजवाहा पर बने पुल के समीप पहुंचे, उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई और पुल से सटे विद्युत पोल से जोरदार टक्कर हो गई।
टक्कर इतनी भीषण थी कि आसपास के लोग आवाज सुनकर दौड़ पड़े। लेकिन जब तक लोग मौके पर पहुंचते, तब तक भगवान दास गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
‘खूनी पुल’ क्यों बना दहशत का पर्याय?
निचलौल-पुरैना मार्ग पर स्थित यह पुल लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि पुल संकरा है, किनारों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है और रात के समय रोशनी की भी समुचित व्यवस्था नहीं रहती।
इस पुल पर पहले भी कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। स्थानीय लोग इसे ‘खूनी पुल’ कहने लगे हैं, क्योंकि यहां बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए।
पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी सारिका सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला तेज रफ्तार या बाइक के अनियंत्रित होने का प्रतीत होता है, हालांकि अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। परिजनों की ओर से अभी तक कोई लिखित तहरीर नहीं दी गई है।
परिवार में मचा कोहराम
भगवान दास गुप्ता की मौत की खबर जैसे ही उनके घर पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। होली की तैयारियों में जुटा परिवार अचानक मातम में डूब गया। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि भगवान दास परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।
पड़ोसियों के अनुसार, वह मिलनसार और मेहनती व्यक्ति थे। पूरे मोहल्ले में शोक की लहर है। गांव के लोग परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।
प्रशासन से उठी मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश भी देखा गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ‘खूनी पुल’ की सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए। पुल के दोनों ओर रेलिंग लगाई जाए, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की जाए और चेतावनी संकेतक बोर्ड लगाए जाएं।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी हादसे हो सकते हैं। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से भी हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
सड़क सुरक्षा पर सवाल
यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। संकरी सड़कें, अपर्याप्त संकेतक, टूटी रेलिंग और अंधेरे में डूबे मार्ग अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। नियमित निरीक्षण और दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान कर वहां सुधारात्मक कार्य कराए जाने चाहिए।
त्योहार के बीच मातम
होली जैसे त्योहार के ठीक पहले हुई इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। जहां एक ओर लोग रंग और गुलाल की तैयारी में थे, वहीं दूसरी ओर एक परिवार अपूरणीय क्षति से जूझ रहा है।
समाज के लिए यह एक चेतावनी भी है कि सड़क पर सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है। तेज रफ्तार, लापरवाही और असुरक्षित ढांचा मिलकर किसी भी खुशहाल परिवार को पलभर में तबाह कर सकते हैं।

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