महंगाई के बीच चौकीदार परेशान, मानदेय बढ़ाने की मांग तेज

Rakesh Chaudhary
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उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की जमीनी कड़ी माने जाने वाले ग्राम प्रहरी/चौकीदार इन दिनों गहरी चिंता और निराशा में हैं। प्रदेश भर में लगभग 70 हजार चौकीदार वर्षों से वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हो पाया है। महंगाई बढ़ती जा रही है, जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं, लेकिन मानदेय वहीं का वहीं है। ऐसे में चौकीदारों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
ग्राम चौकीदार गांव का पहला प्रहरी होता है। वह रात में गश्त करता है, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखता है, पुलिस को सूचना देता है, त्योहारों और चुनाव के दौरान विशेष सतर्कता बरतता है। होली, दिवाली, ईद या पंचायत चुनाव—हर मौके पर प्रशासन की नजर सबसे पहले चौकीदार पर ही रहती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस और जनता के बीच संवाद का सेतु भी यही चौकीदार होते हैं। किसी भी आपराधिक घटना, विवाद, या बाहरी व्यक्ति की सूचना सबसे पहले यही देते हैं। इसके बावजूद उनकी मेहनत के अनुरूप वेतन नहीं मिल पा रहा है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों—महराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, बलिया, वाराणसी सहित अन्य जनपदों के चौकीदारों का कहना है कि वर्तमान मानदेय से परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
एक चौकीदार ने बताया, “बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन, दवा और बिजली बिल—सब कुछ महंगा हो गया है। लेकिन हमारा वेतन सालों से नहीं बढ़ा। हम भी इंसान हैं, हमारा भी परिवार है।”
महंगाई दर में लगातार वृद्धि के बावजूद मानदेय में संशोधन न होना चौकीदारों के लिए गंभीर समस्या बन चुका है। कई चौकीदारों को अतिरिक्त मजदूरी या अन्य छोटे-मोटे काम करने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी ड्यूटी पर भी असर पड़ता है।
आज के समय में गांवों में अपराध के स्वरूप भी बदल रहे हैं। साइबर ठगी, अवैध शराब, जमीन विवाद और बाहरी तत्वों की गतिविधियां बढ़ी हैं। ऐसे में चौकीदारों पर नजर रखने और तुरंत सूचना देने की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है।
चुनाव और त्योहारों के दौरान उन्हें अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ती है, लेकिन उसके बदले कोई विशेष भत्ता या प्रोत्साहन राशि नहीं मिलती।
चौकीदार संघ के पदाधिकारियों ने राज्य सरकार से अपील की है कि जल्द से जल्द वेतन पुनरीक्षण किया जाए। उनका कहना है कि यदि न्यूनतम वेतन के अनुरूप मानदेय तय किया जाए तो उन्हें राहत मिल सकती है।


उन्होंने मांग की है:
मानदेय में तत्काल बढ़ोतरी किया जाए


चौकीदारों का कहना है कि वे सरकार और प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं, इसलिए उनके साथ भी न्याय होना चाहिए।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि चौकीदारों की मांगों को उच्च स्तर पर भेजा गया है। कई जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को विधानसभा और संबंधित विभागों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है।
अब देखना यह है कि सरकार कब तक इस पर निर्णय लेती है। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो चौकीदार आंदोलन की राह भी अपना सकते हैं, हालांकि वे कानून-व्यवस्था को प्रभावित किए बिना अपनी आवाज उठाना चाहते हैं।
चौकीदारों को उम्मीद है कि क्षेत्रीय विधायक, सांसद और पंचायत प्रतिनिधि उनकी आवाज सरकार तक मजबूती से पहुंचाएंगे। ग्रामीण जनता भी मानती है कि गांव की सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने में चौकीदारों की भूमिका महत्वपूर्ण है, इसलिए उन्हें उचित मानदेय मिलना चाहिए।

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