बीएचयू के डालमिया हॉस्टल में चिकन करी में निकली मरी हुई छिपकली, छात्रों का फूटा गुस्सा

Rakesh Chaudhary
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बताया जा रहा है कि रात के खाने के दौरान मेस में छात्रों को चिकन करी परोसी गई थी। इसी बीच एक छात्र की नजर करी में पड़ी किसी अजीब वस्तु पर गई। जब उसने करीब से देखा तो उसमें मरी हुई छिपकली दिखाई दी। यह खबर कुछ ही मिनटों में पूरे हॉस्टल में फैल गई और मेस में मौजूद छात्रों के बीच दहशत का माहौल बन गया। कई छात्रों ने तुरंत खाना छोड़ दिया, जबकि कुछ छात्र जो पहले ही खाना खा चुके थे, वे घबराकर बाहर निकल आए।

छात्रों का आरोप है कि मेस में लंबे समय से खाने की गुणवत्ता बेहद खराब थी, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही थी। छात्रों ने कहा कि कई बार खाने में गंदगी मिलने और खराब भोजन परोसे जाने की शिकायत की गई थी, लेकिन मेस प्रबंधन ने हर बार मामले को नजरअंदाज कर दिया। इस घटना के बाद छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मेस प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

प्रत्यक्षदर्शी छात्रों के मुताबिक, चिकन करी में छिपकली मिलने की सूचना मिलते ही मेस में मौजूद छात्रों ने खाना बंद कर दिया। कुछ छात्रों ने मोबाइल से वीडियो और तस्वीरें भी बना लीं, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। वायरल तस्वीरों में खाने के बर्तन में मरी हुई छिपकली जैसी आकृति साफ दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन भी हरकत में आ गया।

घटना की जानकारी मिलते ही हॉस्टल प्रशासन और विश्वविद्यालय के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों को शांत कराने की कोशिश की और मामले की जांच का आश्वासन दिया। हालांकि छात्र तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। छात्रों ने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ है। यदि समय रहते इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगाई गई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

छात्रों का कहना है कि हॉस्टल में रहने वाले हजारों छात्र पूरी तरह मेस के खाने पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए। लेकिन मेस में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि रसोईघर में नियमित निरीक्षण नहीं होता और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की भी ठीक से जांच नहीं की जाती।

घटना के बाद कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने की सूचना पर मेडिकल टीम को भी बुलाया गया। कई छात्रों ने मितली और बेचैनी की शिकायत की। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी छात्र की हालत गंभीर नहीं बताई गई। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद छात्रों को आराम करने की सलाह दी। इसके बावजूद छात्रों में डर और नाराजगी बनी रही।

मेस में मौजूद कर्मचारियों से जब छात्रों ने जवाब मांगा तो वहां काफी देर तक बहस होती रही। छात्रों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने पहले मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन जब विरोध बढ़ा तो अधिकारियों को सूचना दी गई। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि खाने की तैयारी के दौरान स्वच्छता के मानकों का पालन नहीं किया जाता और रसोईघर की स्थिति चिंताजनक है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति गठित करने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मेस व्यवस्था की निगरानी और सख्त की जाएगी।

इस घटना के बाद छात्रों में मेस व्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी देखी गई। देर रात तक छात्र हॉस्टल परिसर में जमा रहे और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते रहे। कई छात्रों ने कहा कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और भोजन की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

छात्र संगठनों ने भी घटना की निंदा की है। उनका कहना है कि देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल बीएचयू जैसे विश्वविद्यालय में इस तरह की घटनाएं बेहद शर्मनाक हैं। छात्र नेताओं ने कहा कि यदि छात्रों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों और मेस ठेकेदार पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही हॉस्टल मेस की नियमित जांच की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इस पूरे मामले ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों में भी इस घटना को लेकर चिंता देखी जा रही है। उनका कहना है कि बच्चे पढ़ाई के लिए घर से दूर हॉस्टल में रहते हैं और यदि वहां भी सुरक्षित एवं स्वच्छ भोजन नहीं मिलेगा तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन मामले की जांच में जुटा हुआ है। वहीं छात्र दोषियों पर कार्रवाई और मेस व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। घटना ने एक बार फिर छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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